शेयर बाजार क्या है आसान भाषा में | What is stock market?

शेयर बाजार क्या है आसान भाषा में | What is stock market?

दोस्तों पैसों को इन्वेस्ट करने की अहमियत के बारे में तो हम सभी जानते हैं और आज कल इन्वेस्ट करने के कई तरीके आप में से कई लोगों ने मुझसे पूछा है। स्टॉक मार्केट के बारे में तो मैं पर्टिकुलरली सिर्फ स्टॉक मार्केट के बारे में ही बात करूँगा। लेकिन इस स्टॉक मार्केट का नाम सुनकर बहुत से लोगों के दिमाग में कन्फ्यूजन और डर पैदा हो जाता है की ये स्टॉक क्या होता है, कैसे इन्वेस्ट करते हैं? पैसे डूब जाएंगे, बेकार है ये बहुत रिस्क होता है, लेकिन दोस्तों रिस्क तो कुकर में, खाना पकाने में भी। पर अगर आपको खाना पकाना आता है तो उसका रिस्क कम हो जाता है। रिस्क तो गाड़ी चलाने में भी है पर अगर आप अच्छे से गाड़ी चलाना जानते हो तो ऐक्सिडेंट का खतरा कम हो जाता है।

ठीक उसी तरह स्टॉक मार्केट में फिर इसके और आप इस रिस्क से कभी भी नहीं बच पाओगे। लेकिन अगर आपके पास सही नॉलेज है तो आप इस रिस्क को काफी हद तक कम कर सकते हो।इसके बाद बहुत से लोगों का मानना है कि स्टॉक मार्केट एक जुआ है। हाँ, अगर आपको इसके बारे में कुछ नहीं पता है और फिर भी आप उसमें इन्वेस्ट किये जा रहे हो तो यह आपके लिए एक जुआ ही है। 



आपको यह समझना होगा कि रिस्क कैलकुलेटेड रिस्क में फर्क होता है। आपको स्टॉक मार्केट में कैलकुलेटेड रिस्क लेना होगा। कैलकुलेटेड रिस्क कैसे लेते हैं? आइये देखते हैं सबसे पहले आप ये डिसाइड करो कि आप कितना रिस्क ले सकते हो।अगर आप यंग हो और महीने में अच्छा पैसा बचा लेते हो तो आप स्टॉक मार्केट में ज्यादा रिस्क ले सकते हो, लेकिन अगर आप 60 साल के हो तो आपको कम रिस्क लेना होगा। साथ ही आप यह देखो कि आप जो रिस्क ले रहे हो उस पर आपको कितना प्रॉफिट मिल रहा है। अगर आपको फायदा सिर्फ ₹5 का हो रहा है लेकिन ₹20 का नुकसान होने का चान्सेस तो आपको इस तरह के इन्वेस्टमेंट नहीं करना चाहिए। तो सबसे पहले हमें स्टॉक मार्केट की एबीसीडी जान लेते हैं।ताकि आपको इसके बारे में पता लग जाए। हर कंपनी को ग्रो करने के लिए पैसे चाहिए होते है। कंपनी के फाउंडर के पास अगर पैसे है तो वो खुद के पैसे उसमें लगा सकता है। कुछ अमीर लोगों को मना कर उनसे अपनी कंपनी में इन्वेस्ट करवा सकता है या फिर पब्लिक फंडिंग के जरिए पैसे ला सकता है। पब्लिक फंडिंग में कंपनी आम जनता से पैसे लेती है। वो अपने बहुत से शेयर्स मार्केट में ऑफर कर देती, जिसे आईपीओ कहा जाता है, यानी की
  

(IPO) इनिशियल पब्लिक ऑफर। फिर आम लोग इस शहर को इस (IPO) आईपीओ के जरिए खरीदते हैं और कंपनी के हिस्सेदार बन जाते हैं। इस तरह से कंपनी को ग्रो करने के लिए पैसे मिल जाते है। एग्जाम्पल के लिए अगर एक कंपनी की कीमत 3,00,00,000 है और उसने अपने 3,00,000 शेयर्स निकालें तो उसके हर एक शेयर की कीमत होगी। ₹100 अब अगर आप उसके 20 शेयर्स खरीद लेते हो तो आप उस कंपनी में ₹2000 के मालिक बन जाते हो?आपको उस कंपनी में ₹2000 का हिस्सा है। इसी हिस्से को शेयर करते हैं और अब आप उस कंपनी के शेयर होल्डर बन चूके हों। इसके बाद अगर वो कंपनी फ्यूचर में ग्रो करके 6,00,00,000 की हो जाती है, तो उसके एक शेयर की कीमत ₹100 से बढ़कर ₹200 हो जाएगी। आपके इन्वेस्ट किये गए ₹2000 4000 बन जाएंगे। वैसे ही अगर कंपनी लॉस में जा कर 1,00,00,000 की हो जाती है तो उसका एक शेर ₹33 का हो जाएगा।आप जब चाहें अपने शेयर्स को बेंचकर अपने पैसे को वापस पा सकते हैं। अगर आपको लग रहा है कि कंपनी डूब रही है या फ्यूचर में वो आपको प्रॉफिट कमा कर नहीं दे सकती तो आप उस कंपनी के शेयर्स को स्टॉक मार्केट में बेच सकते हो और उससे अपने पैसे वापस पा सकते हो। कंपनी को जो प्रॉफिट होता है तो वो कभी कभी उसे अपने शेयर होल्डर्स में बांट देती है। या तो वो अपने शेयर होल्डर्स को पैसे दे सकती है या फिर उसे और शेर दे सकती है।इसे डिविडेंड कहा जाता है। कंपनी के शेयर्स के दाम तब बढ़ जाते हैं जब इसे बहुत से लोग खरीदना चाहते हैं। मार्केट का एक यूनिवर्सल लॉ है इफ डिमांड प्राइस। इसका मतलब है अगर एक कंपनी बहुत प्रॉफिट कमा रही है तो उसके स्टॉक्स बहुत से लोग खरीदना चाहेंगे। अगर उसके स्टॉक्स बहुत से लोग खरीदना चाहेंगे तो उसकी डिमांड बढ़ जाएगी और उसकी कीमत भी ठीक है।की तरह अगर कंपनी नुकसान में जा रही है तो उसके स्टॉक्स कोई नहीं लेना चाहेगा। जिन लोगों ने उसे ले रखे हैं, उसे बेचने लगेंगे और उसके प्राइस घट जाएंगे। देखिए, सिंपल रूल यह है कि आपको एक कंपनी में तब इन्वेस्ट करना चाहिए जब उसके स्टॉक की कीमत कम हो। इसके बाद जब उसकी कीमत बढ़ेगी तो या तो आप उसे भेज दीजिए और तुरंत पैसे वापस ले लीजिये या फिर लॉन्ग टर्म के लिए इन्वेस्ट करने के इरादे से उसे वहीं पर छोड़ दीजिये।एक एग्ज़ैम्पल बताता हूँ। 2004 में जिंस भी आदमी ने गूगल में लॉन्ग टर्म के लिए अपना पैसा लगाया होगा। उसे अब तक अरबों रुपए का प्रॉफिट डिविडेंड के रूप में मिला होगा और अगर वो अपने शेयर्स नहीं बेचता है तो उसे जिंदगी भर गूगल से पैसे मिलते रहेंगे। लेकिन सारी कंपनीस गूगल और फेसबुक की तरह नहीं होती। बहुत सी फेल हो जाती है, जिससे इनवेस्टर्स को नुकसान हो जाता है। इसलिए आपको स्टॉक मार्केट को बहुत डीप में समझने की जरूरत है।


इंडिया में दो स्टॉक एक्सचेंज हैं, जिनका नाम है बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज सबसे बड़ा एक्सचेंज है। आप इन दोनों में से किसी में भी अपना पैसा लगा सकते हो। इसमें इन्वेस्ट करने के लिए आपको अपना एक डीमैट अकाउंट खोलना होगा, जिस तरह से आपके बैंक अकाउंट में पैसे रखे होते हैं। इसी तरह से डीमैट अकाउंट में शेयर्स रखे होते हैं। ये डीमैट अकाउंट आपके सेविंग अकाउंट से लिंक हो जाता है। इससे होता ये है कि आप अपने डीमैट अकाउंट से कोई भी शेयर्स जब बेचते हो मार्केट में तो वो पैसा डाइरेक्टली आपके सेविंग अकाउंट में आ जाता है। 

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